Home » Cashless Payments Knowledge Hub » जीरो बैलेंस अकाउंट के बारे में आम गलतफहमियाँ – सच्चाई जानें
मान लीजिए कि आपको यूएई में नौकरी मिल गई है और अपनी सैलरी पाने के लिए आपको एक सैलरी बैंक अकाउंट खुलवाना है। आप इंटरनेट पर “सैलरी अकाउंट यूएई” सर्च करते हैं, तो पाते हैं कि इंटरनेट पर “जीरो बैलेंस,” “मिनिमम बैलेंस,” और “फ्री सैलरी अकाउंट” जैसे कई उलझे हुए शब्द भरे पड़े हैं। आप आसानी से यह सोच सकते हैं कि इन सभी शब्दों का मतलब एक ही है कि एक ऐसा अकाउंट जिसमें कोई मिनिमम बैलेंस न हो और कोई अन्य शर्तें भी न हों।
हालाँकि, ऐसा नहीं है। जीरो-बैलेंस अकाउंट का मतलब आमतौर पर एक ऐसा अकाउंट होता है जिसमें कोई मिनिमम बैलेंस रखने की शर्त नहीं होती। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सब कुछ फ्री है।
फर्स्ट अबू धाबी बैंक (FAB) के डिजिटल अकाउंट, Payit में मिनिमम मासिक बैलेंस रखने की कोई शर्त नहीं है। एलिजिबल नौकरीपेशा कस्टमर, एलिजिबिलिटी की शर्तों को पूरा करने पर, Payit Plus के जरिए अपनी सैलरी भी प्राप्त कर सकते हैं।
लेकिन क्या मिनिमम बैलेंस न होने का मतलब यह है कि कोई फीस या दूसरी शर्तें नहीं होंगी? इस आर्टिकल में, हम यूएई में जीरो-बैलेंस अकाउंट से जुड़ी कुछ आम गलतफहमियों को दूर करेंगे और बताएंगे कि ऐसा अकाउंट चुनने से पहले आपको किन बातों को चेक करनी चाहिए।
जीरो-बैलेंस अकाउंट का मतलब आमतौर पर ऐसे अकाउंट से होता है जिसमें मिनिमम बैलेंस रखने की कोई शर्त नहीं होती। इसका मतलब यह है कि मिनिमम बैलेंस न रखने पर लगने वाले चार्ज से बचने के लिए, आपको अकाउंट में कोई निश्चित अमाउंट रखने की बाध्यता नहीं होती [5]।
अब इस बात को एक उदाहरण से समझते हैं। यूएई के कई अकाउंट्स में मिनिमम बैलेंस 3,000 AED तय किया गया है, क्योंकि सेंट्रल बैंक के पर्सनल लोन नियमों के तहत यही अमाउंट तय किया गया है। अगर आपके अकाउंट में इससे कम अमाउंट होता है, तो आप पर चार्जेस लग सकते हैं। वहीं नो-मिनिमम-बैलेंस अकाउंट में ऐसी कोई शर्त नहीं होती।
ध्यान रखें: मिनिमम बैलेंस की शर्त न होने का मतलब यह नहीं है कि कोई सर्विस चार्ज नहीं लगेगा या कोई एलिजिबिलिटी शर्तें नहीं होंगी। दूसरे शब्दों में, जिस अकाउंट में मिनिमम बैलेंस रखने की कोई शर्त नहीं होती, उस पर भी एक्स्ट्रा चार्जेस लग सकते हैं। [2]
फैक्ट: जीरो बैलेंस का मतलब मिनिमम बैलेंस की आवश्यकता से है, न कि चार्ज से। सर्विस प्रोवाइडर अकाउंट के प्रकार के आधार पर, कुछ सर्विसेज — जैसे एटीएम से पैसे निकालना, कार्ड बदलना, पैसे ट्रांसफर करना या दूसरी सर्विसेज — के लिए चार्ज लग सकता है[5]। किसी भी लागू चार्ज के बारे में जानने के लिए की फैक्ट्स स्टेटमेंट, फीस/चार्जेस की लिस्ट और नियम व शर्तें देखें।
फैक्ट: जीरो-बैलेंस अकाउंट और जिसे कोई सर्विस प्रोवाइडर “फ्री सैलरी अकाउंट” कहता है, जरूरी नहीं कि उन दोनों का मतलब एक ही हो। जीरो-बैलेंस अकाउंट का मतलब आमतौर पर एक ऐसे अकाउंट से होता है जिसमें कोई मिनिमम बैलेंस रखने की शर्त नहीं होती। “फ्री” का मतलब अलग-अलग सर्विस प्रोवाइडर के हिसाब से अलग हो सकता है, और इसमें कुछ फीस या चार्ज लग सकते हैं। इसलिए अकाउंट खोलने से पहले, उस प्रोडक्ट से जुड़ी शर्तें और फीस जरूर देख लें।
फैक्ट: यह सच नहीं है। यूएई में कुछ ऐसे सैलरी अकाउंट हैं, जिनमें कोई मिनिमम बैलेंस रखने की जरूरत नहीं होती। अपने ऑप्शंस को समझने के लिए, यह देखना मददगार होगा कि अकाउंट की शर्तें आमतौर पर किन तीन तरीकों से काम कर सकती हैं:
फैक्ट: मिनिमम बैलेंस और सैलरी से जुड़ी एलिजिबिलिटी, दोनों अलग-अलग शर्तें हैं। हो सकता है कि किसी अकाउंट में मिनिमम बैलेंस रखने की कोई शर्त न हो, लेकिन उसमें हर महीने सैलरी आना जरूरी हो, या फिर सैलरी की कोई मिनिमम लिमिट या उससे जुड़ी दूसरी शर्तें हों। अगर आप बिना सैलरी ट्रांसफर किए अकाउंट खोल रहे हैं, तो संबंधित बैंक या संस्था की शर्तें जरूर देख लें, क्योंकि एलिजिबिलिटी, बैलेंस और दूसरी शर्तें अलग-अलग प्रोडक्ट्स के हिसाब से अलग-अलग हो सकती हैं।
फैक्ट: मिनिमम बैलेंस की जरूरतें और सैलरी, ये दोनों अलग-अलग चीजें हैं। कोई व्यक्ति नो-मिनिमम-बैलेंस अकाउंट को इसलिए चुन सकता है क्योंकि इसमें ज्यादा लचीलापन मिलता है, चाहे उसकी कमाई कितनी भी हो। इसलिए, जीरो-बैलेंस अकाउंट जरूरी नहीं कि सिर्फ कम सैलरी वाले लोगों के लिए ही बनाया गया हो।
फैक्ट: मिनिमम बैलेंस की कोई शर्त न होने का मतलब यह नहीं है कि अकाउंट तुरंत या बिना वेरिफिकेशन के खोला जा सकता है। भले ही आवेदन पूरी तरह से डिजिटल हो, फिर भी कस्टमर्स को केवाईसी और पहचान का वेरिफिकेशन पूरा करना पड़ सकता है। इसके अलावा, प्रोडक्ट के आधार पर एलिजिबिलिटी या रोजगार से जुड़ी दूसरी जांच भी हो सकती हैं। Payit में मिनिमम बैलेंस की शर्त के बिना डिजिटल अकाउंट खोला जा सकता है। Payit Plus के जरिए सैलरी पाने के लिए, अकाउंट सेटअप, वेरिफिकेशन और एलिजिबिलिटी से जुड़ी सभी शर्तें पूरी करनी होंगी।[3]
फैक्ट: हर जीरो-बैलेंस अकाउंट आपकी सैलरी पाने के लिए नहीं बना होता है। जीरो-बैलेंस अकाउंट का बस इतना ही मतलब है कि आपको अकाउंट में कोई मिनिमम अमाउंट बनाए रखने की जरूरत नहीं है। वहीं दूसरी ओर, सैलरी अकाउंट खास तौर पर आपकी सैलरी पाने के लिए ही बनाया जाता है।
उदाहरण के लिए, Payit एक ऐसा डिजिटल अकाउंट देता है जिसमें कोई मिनिमम बैलेंस रखने की जरूरत नहीं होती, जबकि Payit Plus को खास तौर पर सैलरी ट्रांसफर के लिए डिजाइन किया गया है। एलिजिबल यूजर्स जरूरी सेटअप पूरा करने के बाद अपनी सैलरी सीधे अपने Payit Plus अकाउंट में प्राप्त कर सकते हैं।[3]
अप्लाई करने से पहले इन डिटेल्स को चूक कर लें:
पूरी जानकारी के लिए, हमारी गाइड पढ़ें जिसमें उन संकेतों के बारे में बताया गया है जिनसे पता चलता है कि आपको यूएई में जीरो-बैलेंस सैलरी अकाउंट की जरूरत है।
फीचर्स | जीरो बैलेंस अकाउंट | सैलरी बैंक अकाउंट |
मुख्य विवरण | मिनिमम बैलेंस की कोई आवश्यकता नहीं | सैलरी प्राप्त करने के लिए डिजाइन किया गया |
मिनिमम बैलेंस | शायद जरूरत न हो | प्रोवाइडर/अकाउंट पर डिपेंड करता है |
सैलरी ट्रांसफर | शायद जरूरत न हो | अक्सर अकाउंट की शर्तों का हिस्सा |
सैलरी रिक्वायरमेंट | यह प्रोवाइडर पर डिपेंड करता है | लागू हो सकता है |
फीस | यह प्रोवाइडर पर डिपेंड करता है | यह प्रोवाइडर पर डिपेंड करता है |
डिजिटल शुरुआत | यह प्रोवाइडर पर डिपेंड करता है | यह प्रोवाइडर पर डिपेंड करता है |
सैलरी बैंक अकाउंट में जीरो मिनिमम बैलेंस की सुविधा भी हो सकती है, इसलिए ये दोनों चीजें एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। [1]
इसकी उपलब्धता और एलिजिबिलिटी, सर्विस प्रोवाइडर और प्रोडक्ट के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। कस्टमर्स को संबंधित सर्विस प्रोवाइडर की एलिजिबिलिटी शर्तों और लागू नियमों व शर्तों को देख लेना चाहिए।
डॉक्युमेंटेशन और वेरिफिकेशन की जरूरतें, सर्विस प्रोवाइडर, प्रोडक्ट और कस्टमर की परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिए, किसी सामान्य डॉक्युमेंट की लिस्ट पर डिपेंड रहने के बजाय, हमेशा संबंधित सर्विस प्रोवाइडर की मौजूदा जरूरतों को देखें।
नहीं। मिनिमम बैलेंस की आवश्यकताएं और ट्रांजैक्शन की लिमिट्स अलग-अलग होती हैं। प्रोडक्ट और प्रोवाइडर्स के आधार पर, ट्रांसफर, विड्रॉल या दूसरे ट्रांजेक्शन पर लिमिट्स लागू हो सकती हैं।
नहीं। कार्ड मिलना और उससे जुड़ी फीस या शर्तें, उस खास प्रोडक्ट और उसे देने वाली संस्था पर डिपेंड करती हैं।
फीस, फीचर्स, लिमिट्स और एलिजिबिलिटी शर्तें, सर्विस प्रोवाइडर्स की लागू शर्तों के अधीन होती हैं। किसी सर्विस के लिए अप्लाई करने या उसका उपयोग करने से पहले, यूजर्स को लेटेस्ट की फैक्ट्स स्टेटमेंट, फीस/चार्ज की लिस्ट, और नियम व शर्तों को देख लेना चाहिए।
इंटरनेशनल ट्रांसफर को कन्फर्म करने से पहले, आपको हमेशा लागू होने वाली ट्रांसफर फीस, एक्सचेंज रेट, ट्रांसफर लिमिट और दूसरी जरूरी शर्तों को चेक कर लेना चाहिए।
Payit में मिनिमम मासिक बैलेंस रखने की कोई शर्त नहीं है। एलिजिबल नौकरीपेशा कस्टमर, एलिजिबिलिटी की शर्तों को पूरा करने पर, Payit Plus के जरिए अपनी सैलरी भी प्राप्त कर सकते हैं।
जीरो बैलेंस का मतलब एक ऐसे अकाउंट से है जिसमें कोई मिनिमम बैलेंस रखने की जरूरत नहीं होती, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि इसमें कोई फीस या एलिजिबिलिटी की शर्तें नहीं होंगी। किसी अकाउंट को चुनने से पहले, हमेशा बैलेंस की जरूरतों, शुल्क, एलिजिबिलिटी और सुविधाओं के बारे में अच्छी तरह पता कर लें।
[1] CBUAE Rulebook, “Maximum Limits for Fees and Commissions Charged on Retail Customer Service,” https://rulebook.centralbank.ae/en/entiresection/4067
[3] Payit Official Website – https://www.bankfab.com/en-ae/personal/help-and-support/digital-banking/payit
[5] Zero Balance Account in the UAE: What to Look for When Choosing No-Minimum Banking –
https://www.emiratesislamic.ae/en/key-information/financial-wellbeing/zero-balance-account-uae?